अध्याय-3: आर्थिक कारण
आर्थिक कारण
1857 की महान क्रांति के पीछे आर्थिक कारण अत्यंत महत्वपूर्ण थे। अंग्रेजों का प्रमुख उद्देश्य भारत पर शासन करके यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों, कृषि उत्पादन और व्यापार से अधिक से अधिक लाभ कमाना था। उनकी आर्थिक नीतियाँ भारतीय जनता के हितों के बजाय ब्रिटिश उद्योगों और व्यापारियों के लाभ के लिए बनाई गई थीं।
भारतीय संपत्ति का निरंतर दोहन
भारत की आय का बड़ा भाग वेतन, पेंशन, सैन्य खर्च और व्यापारिक लाभ के रूप में सीधे इंग्लैंड भेजा जाता था (Drain of Wealth)।
कृषि पर अत्यधिक करों का बोझ
किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा लगान के रूप में देना पड़ता था। अकाल और सूखे में भी कर राहत नहीं मिलती थी।
परंपरागत उद्योगों और हस्तशिल्प का पतन
औद्योगिक क्रांति के बाद इंग्लैंड में मशीनों से बने सामान को भारत में बेहद कम आयात शुल्क पर बेचा गया, जबकि भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प पर भारी कर लादे गए। इस असमान प्रतिस्पर्धा के कारण भारत का प्रसिद्ध वस्त्र उद्योग नष्ट हो गया। लाखों बुनकर और शिल्पकार बेरोजगार होकर भुखमरी की कगार पर पहुँच गए।
नकदी फसलों की खेती को बढ़ावा
अंग्रेजों ने किसानों को खाद्यान्न फसलों के स्थान पर नील, कपास, अफीम जैसी नकदी फसलें उगाने के लिए मजबूर किया। इससे खाद्यान्न संकट गहरा गया और भयानक अकालों की पृष्ठभूमि तैयार हुई।