1857 की महान क्रांति
एक ऐसी ज्वाला जिसने स्वतंत्रता की चिंगारी को पूरे देश में फैला दिया।
क्रांति के बहुआयामी कारण
राजनीतिक कारण
डलहौजी की 'लैप्स का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse), अवध का विलय तथा मुगल सम्राट का निरंतर अपमान।
आर्थिक कारण
कृषि पर भारी भूमि-कर, कुटीर उद्योगों का विनाश, बुनकरों का शोषण तथा संपत्ति का इंग्लैंड पलायन।
सामाजिक-धार्मिक
सती प्रथा उन्मूलन, ईसाई मिशनरियों का बढ़ता प्रभाव और धर्म परिवर्तन का भय।
सैन्य व तात्कालिक
वेतन में भेदभाव, समुद्र पार तैनाती विवाद तथा एनफील्ड राइफल के कारतूसों में चर्बी का मुद्दा।
क्रांति के प्रमुख केंद्र एवं वीर नायक
नीचे दिए गए केंद्रों पर क्लिक करके संबंधित प्रमुख नायक और उनके ऐतिहासिक योगदान को विस्तार से देखें:
"1857 की क्रांति भले ही अपने लक्ष्य में सफल न हो सकी, लेकिन इसने स्वतंत्रता की लौ को जला दिया, जिसने आगे चलकर पूरे भारत को स्वतंत्रता दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया।"
पोर्टल सेटिंग्स एवं विकल्प
यदि आपने कंटेंट एडिट किया है और वापस मूल पाठ पर जाना चाहते हैं: