राजनीतिक एवं प्रशासनिक कारण
1857 की क्रांति के पीछे अनेक कारण थे, किंतु उनमें राजनीतिक और प्रशासनिक कारण सबसे अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं। अंग्रेजों ने भारत में अपने शासन का विस्तार केवल युद्धों के माध्यम से ही नहीं किया, बल्कि अनेक ऐसी नीतियाँ अपनाईं जिनसे भारतीय राज्यों की स्वतंत्रता समाप्त होती चली गई। इन नीतियों के कारण राजा, नवाब, सामंत, सैनिक और सामान्य जनता सभी वर्गों में असंतोष बढ़ने लगा। धीरे-धीरे यह असंतोष इतना व्यापक हो गया कि 1857 में एक बड़े विद्रोह का रूप ले लिया।
1. लॉर्ड डलहौजी की विस्तारवादी नीति
1848 से 1856 तक भारत के गवर्नर-जनरल रहे लॉर्ड डलहौजी ने अंग्रेजी शासन का विस्तार अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया। उनका विश्वास था कि पूरे भारत को अंग्रेजी शासन के अधीन लाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने अनेक भारतीय राज्यों को विभिन्न बहानों से कंपनी में मिला लिया।
2. लैप्स का सिद्धांत (Doctrine of Lapse)
डलहौजी द्वारा अपनाई गई सबसे विवादास्पद नीति “लैप्स का सिद्धांत” थी। इस सिद्धांत के अनुसार यदि किसी राज्य का शासक बिना प्राकृतिक उत्तराधिकारी (जैविक पुत्र) के मर जाता था, तो उसका राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन चला जाता था। दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता नहीं दी जाती थी। यह नीति भारतीय परंपराओं के विपरीत थी, क्योंकि भारत में दत्तक पुत्र को वास्तविक उत्तराधिकारी माना जाता था।
इस नीति के आधार पर विलीन किए गए राज्य:
- सतारा (1848)
- जैतपुर (1849)
- संभलपुर (1849)
- उदयपुर (मध्य भारत)
- झाँसी (1854)
- नागपुर (1854)
3. अवध का विलय
1856 में अंग्रेजों ने अवध को “कुशासन” का आरोप लगाकर अपने अधीन कर लिया। नवाब वाजिद अली शाह को सत्ता से हटाकर कलकत्ता भेज दिया गया। अवध केवल एक राज्य नहीं था, बल्कि उत्तर भारत का प्रमुख सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र भी था। उसके विलय से लाखों सैनिक, दरबारी, अधिकारी, कलाकार और कारीगर बेरोजगार हो गए।
4. मुगल सम्राट का अपमान
यद्यपि मुगल साम्राज्य केवल नाममात्र का रह गया था, फिर भी भारतीय जनता के मन में मुगल सम्राट के प्रति सम्मान बना हुआ था। अंग्रेजों ने धीरे-धीरे मुगल सम्राट की प्रतिष्ठा समाप्त करने का प्रयास किया। यह घोषणा की गई कि बहादुर शाह ज़फ़र के बाद उनके उत्तराधिकारियों को लाल किला छोड़ना होगा और उन्हें केवल एक सामान्य व्यक्ति की तरह रहने के लिए बाध्य किया जाएगा।