Unification of Rajasthan (राजस्थान का एकीकरण)

राजस्थान का एकीकरण: स्वतंत्रता से वर्तमान स्वरूप तक

एकीकरण की प्रारंभिक पहल

  • 1946 में पहला प्रयास: मेवाड़ के महाराणा भूपालसिंह ने 25 और 26 जून, 1946 को ‘राजस्थान यूनियन’ बनाने के उद्देश्य से उदयपुर में राजस्थान, गुजरात और मालवा के शासकों का एक सम्मेलन बुलाया था।

  • दूसरा सम्मेलन: जयपुर के महाराजा मानसिंह ने भी रियासतों का एक संघ बनाने का प्रस्ताव रखने के लिए शासकों का एक और सम्मेलन आयोजित किया, लेकिन यह बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गया।

  • वर्तमान स्वरूप की तिथि: राजस्थान ने अपना मौजूदा वर्तमान स्वरूप 1 नवंबर, 1956 को प्राप्त किया।

  • कुल चरण: राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ।

  • एकीकरण के समय इकाइयाँ: इस दौरान 19 रियासतें, 3 ठिकाने, और 1 केंद्रशासित प्रदेश शामिल थे।

  • प्रथम हस्ताक्षरकर्ता: विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली पहली रियासत बीकानेर थी।

🔵 एकीकरण के समय राजस्थान के ठिकाने एवं केंद्रशासित प्रदेश

  • तीन ठिकाने:

    • नीमराणा (अलवर): शासक – राव राजेन्द्रसिंह।

    • कुशलगढ़ (बाँसवाड़ा): शासक – हरेन्द्रसिंह।

    • लावा (जयपुर): शासक – बंस प्रदीपसिंह।

  • केंद्रशासित प्रदेश:

    • अजमेर-मेरवाड़ा ही एकमात्र केंद्रशासित प्रदेश था।

एकीकरण के 7 महत्त्वपूर्ण चरण

1️⃣ प्रथम चरण: मत्स्य संघ

  • गठन तिथि: इसका निर्माण 18 मार्च, 1948 को हुआ था।

  • विलय की इकाइयाँ: इसमें चार रियासतें (अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली) और नीमराणा ठिकाना शामिल थे।

  • राजधानी: अलवर को इसकी राजधानी बनाया गया।

  • राजप्रमुख: धौलपुर महाराजा उदयभानसिंह को राजप्रमुख नियुक्त किया गया।

  • प्रधानमंत्री: शोभाराम कुमावत (अलवर प्रजामंडल के नेता) ने प्रधानमंत्री का पद संभाला।

  • नामकरण: के.एम. मुंशी की सिफारिश पर इसका नाम मत्स्य संघ रखा गया।

  • उद्घाटनकर्ता: इसका उद्घाटन नरहरि विष्णु गाडगिल ने किया।

2️⃣ द्वितीय चरण: राजस्थान संघ / पूर्व राजस्थान

  • गठन तिथि: इसका निर्माण 25 मार्च, 1948 को हुआ था।

  • विलय की इकाइयाँ: इसमें 9 रियासतें (बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, शाहपुरा, किशनगढ़, टोंक, बूँदी, झालावाड़, कोटा) तथा दो ठिकाने (कुशलगढ़ व लावा) का विलय किया गया।

  • राजधानी: कोटा को राजधानी बनाया गया।

  • राजप्रमुख: कोटा महाराव भीमसिंह राजप्रमुख बने।

  • प्रधानमंत्री: गोकुललाल असावा (शाहपुरा) प्रधानमंत्री चुने गए।

  • उद्घाटनकर्ता: उद्घाटन नरहरि विष्णु गाडगिल ने किया।

  • चन्द्रवीरसिंह का कथन: बाँसवाड़ा शासक चन्द्रवीरसिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते समय कहा था, “मैं अपने डेथ वॉरन्ट पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ।

3️⃣ तृतीय चरण: संयुक्त राजस्थान

  • गठन तिथि: इसका निर्माण 18 अप्रैल, 1948 को हुआ था।

  • विलय की इकाइयाँ: इसमें पूर्व राजस्थान में उदयपुर रियासत का विलय किया गया।

  • राजधानी: उदयपुर को नई राजधानी बनाया गया।

  • राजप्रमुख: मेवाड़ महाराणा भूपालसिंह महाराज प्रमुख बने।

  • प्रधानमंत्री: माणिक्यलाल वर्मा (मेवाड़) को प्रधानमंत्री बनाया गया।

  • उद्घाटनकर्ता: इसका उद्घाटन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उदयपुर में किया।

4️⃣ चतुर्थ चरण: वृहत् राजस्थान

  • गठन तिथि: इसका निर्माण 30 मार्च, 1949 को हुआ, जिसे राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  • विलय की इकाइयाँ: संयुक्त राजस्थान में चार बड़ी रियासतों (जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर व बीकानेर) का विलय किया गया।

  • राजधानी: जयपुर को राजधानी बनाया गया।

  • महाराज प्रमुख: महाराणा भूपालसिंह (मेवाड़) को महाराज प्रमुख का पद दिया गया।

  • राजप्रमुख: सवाई मानसिंह-द्वितीय (जयपुर) राजप्रमुख बने।

  • प्रधानमंत्री: हीरालाल शास्त्री (जयपुर) प्रधानमंत्री बने।

  • उद्घाटनकर्ता: इसका उद्घाटन सरदार वल्लभभाई पटेल ने जयपुर में किया।

  • विभागों का आवंटन (पी. सत्यनारायण राव समिति):

    • राजधानी: जयपुर

    • न्याय विभाग: जोधपुर

    • शिक्षा विभाग: बीकानेर

    • वन विभाग: कोटा

    • कृषि विभाग: भरतपुर

    • खनिज विभाग: उदयपुर

5️⃣ पंचम् चरण: संयुक्त वृहत् राजस्थान

  • गठन तिथि: इसका निर्माण 15 मई, 1949 को हुआ था।

  • विलय की इकाइयाँ: वृहत् राजस्थान में मत्स्य संघ का विलय किया गया।

  • सिफारिश: यह विलय शंकरराव देव समिति की सिफारिशों पर किया गया।

  • नेतृत्व: इस चरण में नेतृत्व लगभग चतुर्थ चरण जैसा ही रहा (राजधानी: जयपुर, महाराज प्रमुख: भूपालसिंह, राजप्रमुख: सवाई मानसिंह-द्वितीय, प्रधानमंत्री: हीरालाल शास्त्री)।

6️⃣ षष्ठम् चरण: राजस्थान

  • गठन तिथि: इसका निर्माण 26 जनवरी, 1950 को हुआ।

  • विलय की इकाइयाँ: सिरोही रियासत (आबू व देलवाड़ा को छोड़कर) को राजस्थान में शामिल किया गया।

  • महत्व: इसी दिन ‘राजस्थान’ शब्द को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई।

  • नेतृत्व: इस चरण में भी नेतृत्व लगभग पंचम् चरण जैसा ही रहा।

7️⃣ सप्तम् चरण: वर्तमान राजस्थान

  • गठन तिथि: यह अंतिम चरण 1 नवंबर, 1956 को संपन्न हुआ।

  • विलय की इकाइयाँ: राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों पर अजमेर-मेरवाड़ा, माउंट आबू, देलवाड़ा (सिरोही का हिस्सा), और मध्य प्रदेश के सुनेल टप्पा क्षेत्र को राजस्थान में मिलाया गया।

  • क्षेत्र का हस्तांतरण: राजस्थान के सिरोंज क्षेत्र को मध्य प्रदेश में विलय कर दिया गया।

  • राजधानी: जयपुर

  • मुख्यमंत्री: मोहनलाल सुखाड़िया

  • राज्यपाल: सरदार गुरुमुख निहालसिंह

  • पद का परिवर्तन: राजप्रमुख के पद को समाप्त कर, राज्यपाल का नया पद सृजित किया गया।

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