राजस्थान की जलवायु का विस्तृत विवरण
☀️ जलवायु: मूल अवधारणाएँ
- किसी स्थान की दीर्घकालिक वायुमंडलीय दशाएँ जलवायु कहलाती हैं।
- अल्पकालिक वायुमंडलीय दशाएँ मौसम कहलाती हैं ।
- जलवायु के निर्धारक घटक: तापक्रम, वायुदाब, आर्द्रता, वर्षा एवं वायु वेग हैं।
- भारतीय मानसून एवं जलवायु की सर्वप्रथम व्याख्या अरबी यात्री अलमसूदी ने की थी।
🌍 अक्षांशीय स्थिति और ताप कटिबंध
- किसी क्षेत्र की जलवायु का निर्धारण अक्षांशों की सहायता से किया जाता है।
- अक्षांशों के आधार पर विश्व को निम्नलिखित ताप कटिबंध क्षेत्रों में बाँटा गया है:
- उष्ण ताप कटिबंधीय
- शीतोष्ण ताप कटिबंधीय
- शीत कटिबंधीय
- राजस्थान की स्थिति:
- राजस्थान 23° 3’ उत्तरी अक्षांश से 30°12’ उत्तरी अक्षांशों के मध्य स्थित है।
- राजस्थान का 1% भाग (डूंगरपुर व बाँसवाड़ा का दक्षिणी भाग) उष्ण ताप कटिबंधीय क्षेत्र में आता है।
- शेष 99% भाग (कर्क रेखा से उत्तरी क्षेत्र) शीतोष्ण ताप कटिबंधीय क्षेत्र में आता है।
- 23° से 35° अक्षांशों तक ‘उपोष्ण जलवायु’ क्षेत्र आता है।
- इस कारण राजस्थान की जलवायु शुष्क से उप-आर्द्र तथा उप उष्ण (शीतोष्ण) है।
🏞️ जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
- समुद्र से दूरी:
- अरब सागर का समुद्र तट राजस्थान से लगभग 350 किलोमीटर दूर है, इसलिए समुद्री प्रभाव नगण्य है।
- समुद्र से दूरी बढ़ने पर शुष्कता बढ़ती है और आर्द्रता घटती है।
- समुद्र तल से ऊँचाई:
- प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर 1° C तापमान कम हो जाता है।
- इसी कारण माउण्ट आबू ठण्डा रहता है ।
- राजस्थान के सामान्य तापमान और माउण्ट आबू के ताप में लगभग 11° C का अंतर है।
- अरावली पर्वतमाला की स्थिति:
- यह अरब सागरीय मानसून के समानान्तर फैली हुई है (उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम)।
- इस समानांतर स्थिति के कारण राजस्थान में अधिक वर्षा नहीं हो पाती है।
- भौगोलिक स्थिति (प्रकृति):
- राजस्थान विश्व के सबसे युवा मरुस्थल (थार) का भाग है, जिसके कारण यहाँ गर्म जलवायु रहती है।
- विभिन्न ऋतुओं में तापमान की विषमताओं के कारण यहाँ की जलवायु को महाद्वीपीय जलवायु कहा जाता है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जलवायु प्रदेश (वर्षा और तापक्रम मुख्य मापदण्ड)
जलवायु प्रदेश | वर्षा औसत | ग्रीष्म ऋतु तापमान | शीत ऋतु तापमान | प्रमुख जिले | वनस्पति |
शुष्क | 10 से 20 सेमी. | 45°C से 50°C | 0°C से 8°C | बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर,पश्चिमी जोधपुर | मरुद्भिद (जीरोफाइट्स), कँटीली झाड़ियाँ |
अर्द्ध शुष्क | 20 से 40 सेमी. | 36°C से 42°C | 10°C से 17°C | जालोर, पाली, जोधपुर का पूर्वी भाग, नागौर, सीकर, झुंझुनूँ | स्टेपी तुल्य |
उप आर्द्र | 40 से 60 सेमी. | 45°C से 50°C | 12°C से 18°C | सीकर का पूर्वी भाग, जयपुर, दौसा, अजमेर | पर्वतीय व पतझड़ |
आर्द्र | 60 से 80 सेमी. | 30°C से 34°C | 14°C से 17°C | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, स. माधोपुर, टोंक, बूँदी, राजसमंद, द. चित्तौड़गढ़ | पतझड़ |
अति आर्द्र | 80 से 100 सेमी. या अधिक | 30°C से 40°C | 12°C से 18°C | झालावाड़, कोटा, बाराँ, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, माउंट आबू | मानसूनी सवाना |
राजस्थान में ऋतुएँ
- ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून):
- सूर्य का उत्तरायण 21 मार्च के बाद प्रारंभ होता है।
- 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता है, जो उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे गर्म दिन माना जाता है।
- इस ऋतु में औसत तापमान $38^{\circ}\text{C}$ से अधिक रहता है।
- सर्वाधिक गर्म जिला: चूरू।
- सर्वाधिक गर्म स्थान: फलोदी (जोधपुर)।
- लू: ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म एवं शुष्क हवाएँ। सर्वाधिक ‘लू’ बाड़मेर जिले में चलती है।
- आँधियाँ: सर्वाधिक आँधियाँ मई-जून में। सर्वाधिक आँधियों वाले जिले: श्रीगंगानगर (27 दिन) व हनुमानगढ़ (23 दिन) । न्यूनतम आँधियों वाले जिले: झालावाड़ (3 दिन) व कोटा (5 दिन)
- भभूल्या: छोटे क्षेत्र में उत्पन्न वायु भँवर (चक्रवात) को स्थानीय क्षेत्र में कहा जाता है।
- वर्षा ऋतु (मध्य जून से मध्य सितंबर):
- भारतीय मानसून की उत्पत्ति हिन्द महासागर के दक्षिण-पश्चिम में होती है, जिसे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहते हैं।
- मानसून अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है मौसम/ऋतु/हवाओं की दिशा में परिवर्तन।
- अरब सागरीय मानसून शाखा (10% वर्षा):
- राजस्थान में सर्वप्रथम बाँसवाड़ा जिले में प्रवेश करती है। बाँसवाड़ा को राजस्थान का मानसून प्रवेश द्वार कहते हैं।
- दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व।
- सर्वाधिक ठहराव और सक्रियता: सिरोही जिले में।
- बंगाल की खाड़ी मानसून शाखा (90% वर्षा):
- स्थानीय भाषा में इसे ‘पुरवड्या’ कहा जाता है।
- राजस्थान के झालावाड़ जिले से प्रवेश करती है।
- दिशा: दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम।
- पश्चिमी भाग में कम वर्षा का कारण: अरावली का ‘वृष्टि छाया’ प्रदेश।
- औसत वार्षिक वर्षा: 57.51 सेमी.।
- सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना: अगस्त।
- सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला: झालावाड़।
- सर्वाधिक आर्द्रता वाला स्थान: माउण्ट आबू (सिरोही)।
- 50 सेमी. सम वर्षा रेखा राजस्थान को दो भागों में विभाजित करती है।
- शीत ऋतु (दिसम्बर से फरवरी):
- सूर्य का ‘दक्षिणायन’ 23 सितंबर के बाद प्रारंभ होता है।
- सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्द्ध में तिरछी पड़ती हैं। 22 दिसंबर को सर्वाधिक तिरछी पड़ती हैं।
- सबसे ठण्डा माह: जनवरी।
- सबसे ठण्डा जिला: चूरू
- सबसे ठण्डा स्थान: माउण्ट आबू।
- मावठ: शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी मानसून या भूमध्यसागरीय चक्रवात (पश्चिमी विक्षोभों) से होने वाली वर्षा। इसे ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ या ‘सुनहरी बूँदें’ कहते हैं, जो रबी की फसलों के लिए उपयोगी
🗺️ जलवायु वर्गीकरण (कोपेन के अनुसार)
🗺️ जलवायु वर्गीकरण (कोपेन के अनुसार)
कोपेन ने जलवायु का वर्गीकरण तापमाप, वर्षा और वनस्पति के आधार पर किया है।
कोड | जलवायु प्रदेश | मुख्य विशेषताएँ | प्रमुख जिले |
Aw | उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु प्रदेश | ग्रीष्म में 30°C से 40°C, 80-100 सेमी. वर्षा। सवाना तुल्य वनस्पति। | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, दक्षिणी चित्तौड़गढ़, झालावाड़। |
BShw | अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश | सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश। वर्षा 20-40 सेमी.। स्टेपी प्रकार की वनस्पति, काँटेदार झाड़ियाँ। | जालोर, बाड़मेर, सिरोही, पाली, नागौर, जोधपुर, चूरू, सीकर, झुंझुनूँ। |
BWhw | उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु प्रदेश | मरुस्थलीय जलवायु। वर्षा 10-20 सेमी.। मरुद्भिद जीरोफाइट्स वनस्पति। | जैसलमेर, बीकानेर, उत्तर-पश्चिमी जोधपुर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर। |
Cwg | उपआर्द्र जलवायु प्रदेश | वर्षा केवल वर्षा ऋतु में, 60 से 80 सेमी.। शुष्क मानसूनी वन। | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, दौसा, करौली, टोंक, बूँदी, भीलवाड़ा, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, उत्तरी कोटा/बाराँ। |
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान में सम्भावित वाष्पन वाष्पोत्सर्जन वार्षिक दर सबसे अधिक जैसलमेर जिले में है।
- मानसून प्रत्यावर्तन का काल: अक्टूबर से मध्य दिसम्बर के प्रारम्भ तक।
- राजस्थान में औसत वर्षा वाले दिनों की संख्या: 29 दिन।
- राजस्थान में सर्वाधिक वार्षिक वर्षा माउंट आबू (48 दिन) में होती है।
भारतीय मौसम विभाग की वैधशाला जयपुर में है।
थॉर्नवेट और ट्रिवार्था के अनुसार राजस्थान के जलवायु प्रदेश
🌿 थॉर्नवेट के अनुसार राजस्थान के जलवायु प्रदेश
थॉर्नवेट ने जलवायु का वर्गीकरण वनस्पति, वाष्पीकरण, और वर्षा को आधार मानकर किया है।
कोड | जलवायु प्रदेश | मुख्य विशेषताएँ | औसत वार्षिक वर्षा | प्रमुख जिले |
EA’d | शुष्क कटिबंधीय जलवायु प्रदेश | अत्यन्त गर्म और शुष्क जलवायु, प्रत्येक मौसम में वर्षा की कमी। केवल मरुस्थलीय वनस्पति उगती है। | 10 से 20 सेमी. तक। | जैसलमेर, उत्तरी बाड़मेर, दक्षिणी-पश्चिमी बीकानेर, पश्चिमी जोधपुर। |
DB’w | अर्द्ध शुष्क मिश्रित जलवायु प्रदेश | शीत ऋतु छोटी और शुष्क, ग्रीष्म ऋतु लंबी और वर्षा वाली। कँटीली झाड़ियाँ और अर्द्ध-मरुस्थलीय वनस्पति। | 15 से 20 सेमी. तक। | उत्तरी भाग, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू एवं बीकानेर का अधिकांश भा。 |
DA’w | उष्ण कटिबंधीय आर्द्र शुष्क जलवायु प्रदेश | ग्रीष्मकालीन तापमान उच्च, वर्षा कम। अर्द्ध मरुस्थलीय वनस्पति पाई जाती है। | 50 से 80 सेमी. तक। | राजस्थान का अधिकांश भाग: बाड़मेर व जोधपुर का अधिकांश भाग, पाली, अजमेर, उत्तरी चित्तौड़, बूँदी, सवाई माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, भरतपुर, जयपुर, अलवर आदि। |
CA’w | उप आर्द्र जलवायु प्रदेश | वर्षा ग्रीष्म ऋतु में, शीत ऋतु प्रायः सूखी रहती है। सवाना तथा मानसूनी वनस्पति पाई जाती है। | 80 से 100 सेमी. तक । | दक्षिणी-पूर्वी उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, बाराँ, झालावाड़ आदि जिले। |
🗺️ ट्रिवार्था के अनुसार राजस्थान के जलवायु प्रदेश
कोड | जलवायु प्रदेश | मुख्य विशेषताएँ | औसत वार्षिक वर्षा | प्रमुख जिले |
Aw | उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु प्रदेश | उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु। तापमान 21°C तक रहता है। | 80 से 100 सेमी. तक। | बाँसवाड़ा, उदयपुर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बाराँ, झालावाड़। |
BSh | उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश | उष्ण और अर्द्ध उष्ण कटिबन्धीय स्टेपी जलवायु इस प्रदेश की विशेषता है। | 40 से 60 सेमी. तक। | पश्चिमी उदयपुर, हनुमानगढ़, राजसमन्द, सिरोही, जालोर, जोधपुर, पाली, अजमेर, नागौर, चूरू, झुंझुनूँ, सीकर, श्रीगंगानगर, बीकानेर आदि। |
BWh | उष्ण कटिबंधीय मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश | उष्ण और अर्द्धउष्ण मरुस्थल जलवायु पाई जाती है। | 10 से 20 सेमी. तक। | जैसलमेर, दक्षिण-पश्चिमी बीकानेर, उत्तर-पश्चिमी बाड़मेर जिले। |
Caw | उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु प्रदेश | अर्द्ध उष्ण आर्द्र प्रदेश। शीत ऋतु में कुछ वर्षा चक्रवातों द्वारा होती है। | 50 से 80 सेमी. तक। | कोटा, बूँदी, बाराँ, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, दौसा व भीलवाड़ा का कुछ भाग। |