राजस्थान का भौतिक स्वरूप
- भौतिक प्रदेश का तात्पर्य- स्थल मण्डल पर स्थित भौगोलिक उच्चावच (जैसे-पर्वत, पठार, मैदान, झील, नदियाँ), प्राकृतिक वनस्पति, वन, प्राकृतिक संसाधन आदि का किसी क्षेत्र विशेष के सन्दर्भ में अध्ययन, भौतिक प्रदेश कहलाता है।
- भौतिक प्रदेश के विभाजन का आधार-
- 1. स्थल स्वरूप जैसे पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल।
- 2. भौगोलिक दशाएँ जैसे जलवायु, मृदा, प्राकृतिक वनस्पति वर्षा की मात्रा ।
- 3. विशिष्ट आर्थिक लक्षण जैसे खनिज संसाधन, ऊर्जा संसाधन, औद्योगिक क्षेत्र एवं विकास।
- 4. कृषि एवं फसल प्रतिरूप।
- 5. जनसंख्या वितरण, परिवहन के साधन इत्यादि।
- राजस्थान के भौतिक प्रदेश- राजस्थान के भौतिक प्रदेशों का सर्वप्रथम वर्गीकरण वर्ष 1968 में प्रो. वी.सी. मिश्रा ने अपनी पुस्तक ‘राजस्थान का भूगोल’ में किया, जिसका प्रकाशन वर्ष 1968 में नेशनल बुक ट्रस्ट ने किया।
- प्रो. वी.सी. मिश्रा ने स्थल स्वरूप, भौगोलिक दशा, कृषि तथा फसल प्रतिरूप, विशिष्ट आर्थिक लक्षण के आधार पर राजस्थान को सात भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया-
- प्रो. वी.सी. मिश्रा द्वारा प्रस्तावित भौगोलिक प्रदेश (1966-68)
भौगोलिक प्रदेश | जिले | |
1 | पश्चिमी शुष्क मैदान | जैसलमेर, बाड़मेर, दक्षिणी-पूर्वी बीकानेर, पश्चिमी जोधपुर, दक्षिणी-पश्चिमी चूरू तथा पश्चिमी नागौर |
2 | अर्द्ध शुष्क प्रदेश | जालोर, पाली, नागौर, सीकर, झुंझुनूं उत्तरी-पूर्वी चूरू व दक्षिणी-पूर्वी जोधपुर |
3 | नहरी क्षेत्र | श्रीगंगानगर, पश्चिमी बीकानेर तथा उत्तरी जैसलमेर |
4 | अरावली प्रदेश | उदयपुर, दक्षिण-पूर्वी पाली, पश्चिमी डूंगरपुर व सिरोही |
5 | पूर्वी कृषि औद्योगिक प्रदेश | जयपुर, सवाई माधोपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बूँदी, भरतपुर, अलवर, धौलपुर व कोटा शहर। |
6 | दक्षिणी-पूर्वी कृषि प्रदेश | बाँसवाड़ा, कोटा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़ व पूर्वी डूंगरपुर |
7 | चम्बल बीहड़ प्रदेश | धौलपुर और सवाई माधोपुर |
- सन् 1971 में डॉ. रामलोचन सिंह ने राजस्थान को भौगोलिक दृष्टि से दो वृहद् प्रदेशों में विभाजित किया था उसके बाद चार उप-प्रदेशों तथा 12 लघु प्रदेशों में वर्णन किया है।
क्र.स. | वृहद् प्रदेश | उप-प्रदेश | लघु प्रदेश |
1 | राजस्थान | 1 मरुस्थलीय |
|
| |||
| |||
II राजस्थान बागड |
| ||
| |||
| |||
| |||
2 | राजस्थान पठार | III अरावली पठार |
|
| |||
| |||
IV चम्बल बेसिन |
| ||
|
- सन् 1964 में डॉ. हरिमोहन सक्सेना ने व प्रो. तिवारी ने “राजस्थान का प्रादेशिक भूगोल” नामक पुस्तक में उच्चावच एवं भौगोलिक संरचना के आधार पर राजस्थान को चार भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया-
- 1. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश (थार का मरुस्थल)
- 2. अरावली पर्वतीय प्रदेश
- 3. पूर्वी मैदानी प्रदेश
- 4. दक्षिण पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती का पठार)
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश (थार का मरुस्थल)
🌍 उत्पत्ति और भौगोलिक पृष्ठभूमि
- नूतन महाकल्प (Neogene Era): थार के मरुस्थल की उत्पत्ति नूतन महाकल्प (चतुर्थक युग) के प्लीस्टोसीन काल में हुई।
- टेथिस सागर का अवशेष: यह प्रदेश टेथिस सागर का अवशेष माना जाता है, जो अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में स्थित है।
- समुद्र का पीछे हटना: सर सिरिल फॉक्स और बैलेण्ड फोर्ड के अनुसार, टर्शियरी काल तक यह क्षेत्र समुद्र के नीचे था, जिसके बाद चतुर्थक महाकल्प में समुद्र के हटने से मरुस्थलीय दशाएँ विकसित हुईं।
- मानवीय प्रभाव: अतिचारण, निर्वनीकरण, और जल-मृदा के अनुचित प्रबंधन ने भी मरुस्थलीय विकास में योगदान दिया।
📜 टेथिस सागर के अवशेष के प्रमाण
- खारे पानी की झीलें: पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में मौजूद खारे पानी की झीलें इसका प्रमाण हैं।
- जीवाश्म खनिज: टर्शियरी कालीन अवसादी चट्टानों में कोयला, पेट्रोलियम, और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म खनिजों के भंडार।
- व्हेल मछली के अवशेष: जैसलमेर के कुलधरा गाँव से व्हेल मछली के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
❌ सहारा मरुस्थल से भिन्नता
- माइकोसिस्ट चट्टानें: थार के मरुस्थल में माइकोसिस्ट चट्टानें मिलती हैं, जो सहारा मरुस्थल में नहीं पाई जाती हैं।
- प्राकृतिक वनस्पति: जैसलमेर के आकल गाँव (राष्ट्रीय जीवाश्म पार्क) में जुरैसिक कालीन प्राकृतिक वनस्पति के अवशेष मिले हैं, जबकि सहारा में ऐसे प्रमाण नहीं हैं।
🗺️ थार के मरुस्थल का विस्तार
- विश्व में स्थान: यह क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का 17वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है।
- देशों में विस्तार: इसका विस्तार भारत और पाकिस्तान में है।
- भारतीय राज्य: यह भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्यों—राजस्थान, गुजरात, पंजाब, और हरियाणा में फैला है।
- राजस्थान में सर्वाधिक: भारत में थार का सर्वाधिक विस्तार राजस्थान में (61.11% क्षेत्रफल पर) है, जबकि न्यूनतम विस्तार हरियाणा में है।
- अक्षांशीय विस्तार: राजस्थान में $25^{\circ} \text{उत्तरी अक्षांश}$ से $30^{\circ} \text{उत्तरी अक्षांश}$ के मध्य।
- देशांतरीय विस्तार: राजस्थान में $69^{\circ}30′ \text{पूर्वी देशान्तर}$ से $70^{\circ}45′ \text{पूर्वी देशान्तर}$ के मध्य।
- लंबाई और चौड़ाई: इसकी लंबाई लगभग 640 किलोमीटर और चौड़ाई 300 से 360 किलोमीटर तक है।
- ऊँचाई: उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में औसत ऊँचाई 300 मीटर और दक्षिणी क्षेत्र में लगभग 150 मीटर है।
- ढाल: मरुस्थल का ढाल पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर है।
✨ थार के मरुस्थल की प्रमुख विशेषताएँ
- धनी मरुस्थल (Rich Desert): जनसंख्या, जनघनत्व और जैव विविधता की दृष्टि से विश्व में प्रथम स्थान होने के कारण इसे ‘धनी मरुस्थल’ कहा जाता है।
- विश्व का शक्तिगृह (World Power House): परम्परागत (कोयला, पेट्रोलियम) और गैर-परम्परागत (सौर, पवन, बायोमास) ऊर्जा संसाधनों की प्रचुर संभावना के कारण यह संज्ञा दी गई है।
- मानसून को आकर्षित करना: यह भारतीय उपमहाद्वीप में न्यून वायुदाब का केंद्र है, जो मानसून को आकर्षित करता है और ऋतु चक्र को नियमित करता है।
- सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश: यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा और न्यूनतम जनघनत्व वाला भौतिक प्रदेश है।
- टर्शियरी कालीन चट्टानें: यहाँ अवसादी चट्टानों की प्रधानता है, जिसमें जीवाश्म खनिज (कोयला, पेट्रोलियम, चूना पत्थर) के भंडार हैं।
- बाड़मेर (गुढ़ामालानी): पेट्रोलियम पदार्थ।
- जैसलमेर (शाहगढ़ सब बेसिन): प्राकृतिक गैस।
- बीकानेर-नागौर (पूनम क्षेत्र): पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस।
- जैसलमेर (सोनू क्षेत्र): चूना पत्थर।
- मृदा: यहाँ रेतीली बलुई मृदा (वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार एन्टीसोल तथा एरिडीसोल) पाई जाती है।
- सिंचाई का साधन: सिंचाई का प्रमुख साधन नहरें हैं, जिनमें इंदिरा गाँधी नहर (मरुगंगा) प्रमुख है।
- वनस्पति और कृषि: यहाँ मरुद्भिद वनस्पति (Xerophytes) पाई जाती है और मुख्यतः खरीफ की फसल का उत्पादन किया जाता है।
- मुख्य नदी: इस क्षेत्र की मुख्य नदी लूणी नदी है।
💬 थार से संबंधित महत्त्वपूर्ण स्थानीय शब्द
- थली: थार के मरुस्थल का स्थानीय नाम।
- धोरे: हवा के साथ स्थान बदलने वाले रेतीले टीले (बालुका स्तूप)।
- लू: ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म एवं शुष्क स्थानीय पवन।
- भ-भूल्या: मरुस्थल में अचानक आने वाला वायु का चक्रवात।
- मावठ (Golden Drops): शीत ऋतु में भूमध्य सागरीय पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा, जो रबी की फसल (गेहूँ) के लिए उपयोगी है।
- पुरवइया: बंगाल की खाड़ी शाखा से आने वाली ग्रीष्मकालीन दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ।
- डांड: मरुस्थलीय क्षेत्र में विशिष्ट लवण झीलों को स्थानीय भाषा में ‘डांड’ कहते हैं।
- रन/टाट/तल्ली: बालुका स्तूपों के मध्य स्थित दलदली क्षेत्र (थोब रन सबसे बड़ा)।
- बॉलसन: प्लाया के सूखने से निर्मित मैदान।
⛰️ राजस्थान में मरुस्थल के प्रकार
- हम्मादा: चट्टानी/पथरीला मरुस्थल (जैसे – पोकरण, फलोदी, बालोतरा)।
- रैग: मिश्रित मरुस्थल जो हम्मादा के चारों ओर पाया जाता है।
- इर्ग: सम्पूर्ण/महान मरुस्थल (जैसे – जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर)।
- लघु मरुस्थल: कच्छ रन (गुजरात) से बीकानेर के मध्य स्थित मरुस्थल।
🌡️ थार के मरुस्थल का जलवायु आधारित वर्गीकरण
1. शुष्क रेतीला प्रदेश (राठी प्रदेश) – (0-25 सेमी. वर्षा)
- विभाजक रेखा: इसे 25 सेमी. वर्षा रेखा (250 मिमी.) अर्द्ध शुष्क प्रदेश से विभाजित करती है।
- उप-विभाजन:
- बालुका स्तूप मुक्त प्रदेश (41.50%): यहाँ धोरे नहीं पाए जाते, यहाँ परतदार (अवसादी) चट्टानें हैं।
- बालुका स्तूप युक्त प्रदेश (58.50%): यहाँ बालुका स्तूपों की प्रधानता है।
📍 महत्त्वपूर्ण स्थल – बालुका स्तूप मुक्त प्रदेश
- लाठी सीरीज: जैसलमेर से मोहनगढ़ तक फैली 64 किलोमीटर लंबी भूगर्भीय जल पट्टी।
- यह मीठे जल और स्टील ग्रेड चूना पत्थर के लिए प्रसिद्ध है।
- यहाँ सेवण घास (वैज्ञानिक नाम Lasiurus sindicus, स्थानीय नाम लीलोण) पाई जाती है।
- इसे पश्चिमी राजस्थान में पारिस्थितिकी संतुलन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।
- चाँदन नलकूप (थार का घड़ा): लाठी सीरीज में स्थित नलकूप, जो आस-पास के क्षेत्र में जलापूर्ति करता है।
- आकल गाँव जीवाश्म पार्क: जैसलमेर में, जहाँ जुरैसिक कालीन प्राकृतिक वनस्पति के अवशेष मिले हैं।
- कुलधरा ग्राम: जैसलमेर का गाँव, जहाँ व्हेल मछली या डायनासोर के अवशेष मिले और पहला कैक्टस गार्डन स्थापित किया गया।
⛰️ बालुका स्तूप (Sand Dunes) – बालुका स्तूप युक्त प्रदेश
- बालुका स्तूप: रेतीली बलुई मृदा से निर्मित लहरदार स्थलाकृति।
- कारवां (घासी): बालुका स्तूपों के मध्य का मार्ग जहाँ से ऊँटों का समूह गुजरता है।
बालुका स्तूप का प्रकार | विशेषताएँ | मुख्य क्षेत्र |
• अनुदैर्ध्य (सीप/रेखीय) | पवन की दिशा के समांतर निर्मित होते हैं। | जैसलमेर (दक्षिण-पश्चिमी), रामगढ़, जोधपुर, बाड़मेर। |
• अनुप्रस्थ | पवन की दिशा के लम्बवत् या समकोण पर निर्मित होते हैं। | रावतसर (हनुमानगढ़), सूरतगढ़, बीकानेर, चूरू। |
• बरखान (अर्द्ध चन्द्राकार) | वायु भँवर के कारण अस्थिर/गतिशील अर्द्धचंद्राकार स्तूप। | भालेरी (चूरू), ओसिया (जोधपुर), सीकर, बाड़मेर। |
• तारा बालुका स्तूप | तारे के समान दिखाई देते हैं। | मोहनगढ़, पोकरण (जैसलमेर), सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर)। |
• पैराबोलिक | परवलयाकार (अर्द्धचंद्राकार) आकृति, सम्पूर्ण मरुस्थल में पाए जाते हैं। | सर्वाधिक बीकानेर जिले में। |
• सब्र काफिज | छोटी झाड़ियों के सहारे बनने वाले स्तूप। | सम्पूर्ण मरुस्थल। |
• नेटवर्क | हनुमानगढ़ से हरियाणा के मध्य एक शृंखला में पाए जाते हैं। | हनुमानगढ़ से हरियाणा के मध्य। |
• अवरोधी | किसी अवरोध के कारण बनते हैं। | पुष्कर, बुढ़ा पुष्कर, जोबनेर पहाड़ियाँ। |
प्लाया झील: बालुका स्तूपों के मध्य निम्न भूमि में वर्षा जल एकत्र होने से बनी अस्थायी झील।- सर्वाधिक जैसलमेर में स्थित हैं।
- खारे जल की प्लाया झील को ‘सैलीनास’ कहते हैं।
- लवणों की मात्रा में वृद्धि वाले क्षारीय क्षेत्र को ‘कल्लर भूमि’ कहते हैं।
2. अर्द्ध शुष्क प्रदेश – (25-50 सेमी. वर्षा)
- विस्तार: शुष्क रेतीले मैदान और अरावली पर्वतीय प्रदेश के मध्य का भू-भाग।
- जलवायु: यह उष्ण मरुस्थलीय जलवायु वाला क्षेत्र है।
🏔️ भौगोलिक संरचना पर आधारित वर्गीकरण
- घग्घर प्रदेश:
- श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में घग्घर नदी द्वारा निर्मित मैदानी प्रदेश।
- घग्घर का तल स्थानीय भाषा में ‘नाली’ कहलाता है।
- घग्घर दोआब: सतलज और घग्घर नदी के बीच की भूमि।
- रेवेरीना मृदा: श्रीगंगानगर में पाई जाती है, जहाँ सर्वाधिक गेहूँ का उत्पादन होता है।
- सेम की समस्या (जल उत्प्लावन): नहरी क्षेत्र के आस-पास भूमिगत जल रिसाव से दलदली भूमि बनना और लवणीयता बढ़ना (रावतसर, पीलीबंगा प्रमुख)।
- शेखावाटी प्रदेश (अंत:स्थलीय प्रवाह का मैदान):
- चूरू, झुंझुनूँ, सीकर और नागौर का उत्तरी क्षेत्र।
- मुख्य नदियाँ: कांतली, रूपनगढ़, और मेन्था।
- झीलें: सांभर, डीडवाना, कुचामन आदि।
- वर्षा जल संरक्षण:
- छोटे तालाब – सर।
- पक्का कुआँ – नाडा।
- कच्चा कुआँ – जोहड़ (डॉ. राजेंद्र सिंह द्वारा जोहड़ विकास कार्यक्रम)।
- नागौरी उच्च भूमि:
- अरावली से पृथक् 300-500 मीटर ऊँचा क्षेत्र, जो सोडियम लवणों की अधिकता के कारण बंजर है।
- मकराना श्रेणी: सफेद संगमरमर (मार्बल)।
- मांगलोद श्रेणी: जिप्सम का जमाव क्षेत्र।
- जायल श्रेणी: फ्लोराइड युक्त जल।
- कूबड़ पट्टी/बांका पट्टी (Houch Belt): जायल (नागौर) से अजमेर के मध्य स्थित फ्लोराइड युक्त जल पट्टी।
- गोड़वाड़ प्रदेश (लूणी बेसिन):
- विस्तार: दक्षिणी जोधपुर, पाली, जालोर, पश्चिमी सिरोही।
- नदी तंत्र: लूणी और उसकी सहायक नदियाँ (लीलड़ी, सूकड़ी, जवाई, जोजरी) द्वारा निर्मित जलोढ़क मैदान।
नमक क्षेत्र: पचपदरा मुख्य खारे पानी का क्षेत्र है, जहाँ नमक बनाया जाता है
अरावली पर्वतीय प्रदेश
⏳ उत्पत्ति और नामकरण
- शाब्दिक अर्थ: ‘पर्वतों की शृंखला’।
- विष्णु पुराण में नाम: सुमेर पर्वत, मेरु पर्वत, या परिपत्र पर्वत।
- उत्पत्ति काल: लगभग 4.88 अरब वर्ष पूर्व आद्य महाकल्प (प्री-पैलायोजोइक एरा) के प्री-कैम्ब्रियन काल में।
- निर्माण प्रक्रिया: यह गोंडवाना लैंड में वलन (Folding) की क्रिया से पर्वतों की एक शृंखला के रूप में बनी।
- गर्भ गृह: अरब सागर को अरावली का गर्भ गृह कहा जाता है।
- उच्चावच की दृष्टि: यह भारत के प्रायद्वीपीय पठारी प्रदेश का भाग है।
- देहली क्रम की चट्टानें: अरावली से पूर्व देहली क्रम की चट्टानों का विस्तार था, जिन्हें राजस्थान में विभाजित किया गया:
- अलवर समूह: अलवर
- अजबगढ़ समूह: सिरोही
- रायलो समूह: बाड़मेर
🗺️ विस्तार और भौगोलिक आयाम
- विस्तार क्षेत्र: भारत के तीन राज्य (गुजरात, राजस्थान, हरियाणा) और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में।
- भारत में कुल लंबाई: पालनपुर (गुजरात) से रायलसीमा/रायसीना (दिल्ली) तक 692 किलोमीटर।
- राजस्थान में विस्तार:
- कुल भाग का लगभग 80% राजस्थान में स्थित है।
- सिरोही से खेतड़ी तक शृंखलाबद्ध है।
- कुल लंबाई 550 किमी है।
- दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में है।
- अक्षांशीय विस्तार: $23^{\circ}20′ \text{उत्तरी अक्षांश}$ से $28^{\circ}20′ \text{उत्तरी अक्षांश}$ के मध्य।
- देशांतरीय विस्तार: $72^{\circ}10′ \text{पूर्वी देशान्तर}$ से $77^{\circ}03′ \text{पूर्वी देशान्तर}$ के मध्य।
- क्षेत्रफल: राजस्थान के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 9% भाग।
- ऊँचाई और चौड़ाई में बदलाव: उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ती है।
- सर्वाधिक चौड़ाई: राजसमंद से बाँसवाड़ा के मध्य।
- सर्वाधिक ऊँचाई: राजसमंद से सिरोही के मध्य।
- सर्वाधिक विस्तार वाला जिला: उदयपुर।
- न्यूनतम विस्तार वाला जिला: अजमेर।
- सर्वाधिक ऊँची चोटियाँ: सिरोही जिले में हैं।
- सर्वाधिक चोटियाँ: उदयपुर जिले में हैं।
✨ अरावली पर्वतीय प्रदेश की विशेषताएँ
- सबसे प्राचीन वलित पर्वतमाला: उत्पत्ति की दृष्टि से विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत माला है (उत्तरी अमेरिका की अप्लेशियन पर्वतमाला के समकक्ष)।
- महान भारतीय जल विभाजक रेखा: इसे यह संज्ञा दी गई है।
- भौगोलिक विभाजन: यह राजस्थान को दो भौगोलिक प्रदेशों (मरुस्थलीय एवं गैर-मरुस्थलीय) में विभाजित करती है।
- नदी उद्गम: यह बनास, लूणी, बेड़च, साबरमती सहित कई नदियों का उद्गम स्थल है।
- मरुस्थल के विस्तार पर रोक: यह मरुस्थल के पूर्ववर्ती विस्तार को रोकती है।
- अवशिष्ट पर्वतमाला: उत्पत्ति के समय इसकी ऊँचाई लगभग 2800 मीटर थी, लेकिन अपरदन के कारण यह वर्तमान में अवशिष्ट पर्वतमाला के रूप में है (औसत ऊँचाई 930 मीटर)।
- चट्टानें और खनिज:
- प्रधानता: धारवाड़ क्रम की ग्रेनाइट, नीस, क्वार्टजाइट चट्टानें।
- खनिज समृद्धि: यह धात्विक खनिजों (लौह अयस्क, ताँबा, सीसा, जस्ता, टंगस्टन, चाँदी) की दृष्टि से समृद्ध है।
- सबसे ऊँची पर्वत शृंखला: यह हिमालयी पर्वतीय प्रदेश और पश्चिमी घाट के मध्य स्थित सबसे ऊँची पर्वत शृंखला है।
- वन सम्पदा और जैव विविधता: राजस्थान में सर्वाधिक वन सम्पदा, वन्यजीव अभयारण्य, और जैव विविधता इसी प्रदेश में पाई जाती है।
- मृदा: यहाँ लाल मृदा (पर्वतीय मृदा, इन्सेप्टीसोल) का विस्तार है, जो मक्का की फसल के लिए उपयोगी है।
- अपवाह तंत्र का उद्गम: यह राजस्थान के तीनों अपवाह तंत्रों (आंतरिक, बंगाल की खाड़ी, अरब-सागरीय) की अधिकांश नदियों का उद्गम स्थल है।
- आदिवासियों की आश्रय स्थली: इसे राजस्थान में आदिवासियों की आश्रय स्थली कहा जाता है।
🗺️ ऊँचाई के आधार पर अरावली का वर्गीकरण
A. उत्तरी अरावली (जयपुर से खेतड़ी)
- औसत ऊँचाई: 450-700 मीटर।
- स्वरूप: क्रमबद्ध न होकर छितरी हुई पहाड़ियों के रूप में।
- शामिल क्षेत्र: तोरावाटी, शेखावाटी, अलवर और जयपुर की पहाड़ियाँ।
- प्रमुख चोटियाँ (ऊँचाई घटते क्रम में):
- • रघुनाथगढ़ (सीकर): 1,055 मीटर
- • खोह (जयपुर): 920 मीटर
- • भैराच (अलवर): 792 मीटर
- • बरवाड़ा (जयपुर): 786 मीटर
- • बाबाई (झुंझुनूँ): 780 मीटर
- दर्रे (Passes): उत्तरी अरावली में कोई दर्रा नहीं है।
B. मध्य अरावली (अजमेर से जयपुर)
- औसत ऊँचाई: लगभग 700 मीटर।
- स्वरूप: पर्वत श्रेणियाँ, संकीर्ण घाटियाँ और मैदान एकांतर क्रम में पाए जाते हैं।
- नदी उद्गम: लूणी नदी का उद्गम नाग पहाड़ से होता है।
- प्रमुख चोटियाँ:
- • गोरमजी (अजमेर): 934 मीटर
- • मेरियाजी/टॉडगढ़ (अजमेर): 933 मीटर
- • तारागढ़ (अजमेर): 873 मीटर
- • नागपहाड़ (अजमेर): 795 मीटर
- प्रमुख दर्रे (Passes):
- • बर दर्रा (अजमेर)
- • अरनिया (अजमेर)
- • सुराघाट (अजमेर)
- • पीपली (अजमेर)
C. दक्षिणी अरावली (आबू से अजमेर)
- औसत ऊँचाई: लगभग 1000 मीटर।
- स्वरूप: अरावली की श्रेणियों की अत्यधिक ऊँचाई एवं सघनता वाला क्षेत्र।
- पठार: भोराट का पठार, लसाड़िया का पठार, और गिरवा पर्वतीय क्षेत्र यहाँ स्थित हैं।
- प्रमुख चोटियाँ (ऊँचाई घटते क्रम में):
- • गुरुशिखर (सिरोही): 1,722 (1727) मीटर – राजस्थान का सर्वोच्च शिखर
- • सेर (सिरोही): 1,597 मीटर
- • देलवाड़ा (सिरोही): 1,442 मीटर
- • जरगा (उदयपुर): 1,431 मीटर – उदयपुर/राजसमंद का सर्वोच्च शिखर
- • अचलगढ़ (सिरोही): 1,380 मीटर
- • कुम्भलगढ़ (राजसमंद): 1,224 मीटर
- प्रमुख दर्रे (Passes):
- • देसूरी की नाल (पाली)
- • सोमेश्वर दर्रा (पाली)
- • कामली घाट (राजसमंद)
- • केवड़ा की नाल (उदयपुर)
- • फुलवारी की नाल (उदयपुर)
- • जीलवा/पगल्या नाल: मारवाड़ को मेवाड़ से जोड़ती है।
🏞️ दक्षिणी अरावली से संबंधित अन्य पहाड़ियाँ
- जसवंतपुरा की पहाड़ियाँ: आबू पर्वत खण्ड के पश्चिम में स्थित।
- छप्पन की पहाड़ियाँ / नाकोड़ा पर्वत: सिवाना पर्वतीय क्षेत्र में स्थित गोलाकार पहाड़ियाँ।
- जालोर की पहाड़ियाँ:
- • डोरा पर्वत: 869 मीटर
- • इसराना भाखर: 839 मीटर
- • रोजा भाखर: 730 मीटर
🌄 अरावली के प्रमुख पठार
पठार का नाम | प्रमुख विशेषताएँ (वनलाइनर) |
• उड़िया का पठार (सिरोही) | राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार (1,360 मीटर)। माउण्ट आबू शहर और नक्की झील यहाँ स्थित हैं। |
• आबू का पठार (सिरोही) | एक बैथोलिक संरचना का उदाहरण; स्थलाकृति की दृष्टि से इन्सेलबर्ग कहलाता है। |
• भोराट का पठार | गोगुन्दा (उदयपुर) से कुम्भलगढ़ (राजसमंद) के मध्य (1,225 मीटर)। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के मध्य जल विभाजक। |
• मेसा का पठार (चित्तौड़गढ़) | बेड़च और गंभीरी नदियों द्वारा अपरदित पठार (620 मीटर)। चित्तौड़गढ़ दुर्ग इसी पर है। |
• लसाड़िया का पठार | जयसमंद झील के पूर्व में स्थित विच्छेदित एवं अपरदित पठारी क्षेत्र (राजस्थान का सबसे कटा-फटा पठार)। |
• देशहरो का पठार | जरगा और रागा की पहाड़ियों के मध्य स्थित वर्षभर हरा-भरा रहने वाला पठारी क्षेत्र (उदयपुर)। |
• भोमट का पठार | उदयपुर-डूंगरपुर-बाँसवाड़ा के मध्य, जहाँ भोमट जनजाति निवास करती है। |
🗺️ अरावली की प्रमुख पर्वत एवं पहाड़ियाँ (स्थानीय नाम)
- गिरवा (उदयपुर): उदयपुर के आस-पास पाई जाने वाली अर्द्धचंद्राकार या तश्तरीनुमा पहाड़ियाँ।
- भाकर (पूर्वी सिरोही): तीव्र ढाल वाली पहाड़ियाँ।
- मेवल (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा): इन दोनों जिलों के मध्य स्थित पहाड़ियाँ।
- मगरा (उदयपुर): उदयपुर के उत्तर-पश्चिम में स्थित अवशिष्ट पहाड़ियाँ।
मेरवाड़ा की पहाड़ियाँ (अजमेर): यहाँ बीठली की पहाड़ी है, जिस पर तारागढ़ दुर्ग (गढ़ बीठली) स्थित है।
पूर्वी मैदानी प्रदेश (Eastern Plains Region)
🌊 उत्पत्ति और विस्तार
- उत्पत्ति काल: इसकी उत्पत्ति नूतन महाकल्प (चतुर्थक महाकल्प) के प्लीस्टोसीन काल में हुई।
- निर्माण: गंगा तथा यमुना नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़कों (Alluvial Deposits) के जमाव (निक्षेप) से इसका निर्माण हुआ।
- राजस्थान में विस्तार: मुख्यत: अरावली पर्वतमाला के पूर्व में।
- क्षेत्रफल: राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का 23% भाग।
- जनसंख्या: राजस्थान की कुल जनसंख्या का 40% यहाँ निवास करता है।
- ढाल: इस प्रदेश का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है।
⭐ प्रमुख विशेषताएँ
- भारतीय उच्चावच का भाग: यह भारत के उत्तरी विशाल मैदान (मध्य के विशाल मैदान) का भाग है।
- विभाजक रेखा: यह मैदान 50 सेमी. (500 मिमी.) समवर्षा रेखा द्वारा विभाजित है।
- प्रमुख नदियाँ: चम्बल, बाणगंगा, बनास, मोरेल, रूपारेल, गंभीर आदि।
- मृदा: यहाँ जलोढ़ (Alfisols) मृदा पाई जाती है।
- सर्वाधिक उपजाऊ: जलोढ़ मृदा के कारण यह सर्वाधिक उपजाऊ तथा सर्वाधिक कृषि संभावना वाला भौतिक प्रदेश है।
- जनघनत्व: कृषि अर्थव्यवस्था का आधार होने के कारण यह राजस्थान का सर्वाधिक जनघनत्व वाला भौतिक प्रदेश है।
- खनिज निर्धनता: यह खनिज संपदा की दृष्टि से राजस्थान का सर्वाधिक निर्धन भौतिक प्रदेश है।
- जलवायु और वर्षा:
- जलवायु: उपआर्द्र जलवायु प्रदेश में शामिल है।
- औसत वर्षा: $60-80 \text{सेमी}$।
- सिंचाई के साधन: सिंचाई के प्रमुख साधन नलकूप तथा कुएँ हैं।
- बीड़: इस क्षेत्र में उगी प्राकृतिक घास को बीड़ कहा जाता है।
🏞️ भौगोलिक संरचना के आधार पर वर्गीकरण
पूर्वी मैदानी प्रदेश को तीन मुख्य बेसिन में विभाजित किया गया है:
1. चम्बल बेसिन (Chambal Basin)
- प्रमुख भौगोलिक विशेषता: बीहड़ (Ravines)।
- बीहड़: चम्बल नदी द्वारा अवनलिका अपरदन (Gully Erosion) से निर्मित उत्खात स्थलाकृति (Badlands Topography), जिसमें घने जंगल पाए जाते हैं।
- विस्तार: यह चम्बल (कोटा) से यमुना नदी (उत्तर प्रदेश) तक फैला हुआ है।
2. बनास-बाणगंगा बेसिन (Banas-Banganga Basin)
- रोही का मैदान (Dooab):
- • जयपुर से भरतपुर के मध्य बाणगंगा तथा यमुना नदियों के मध्य स्थित मैदानी प्रदेश।
- मालपुरा-करौली मैदान:
- • मालपुरा (टोंक) से करौली के मध्य बनास तथा बाणगंगा नदियों के मध्य स्थित दोआब प्रदेश।
- खैराड़ प्रदेश:
- • जहाजपुर (भीलवाड़ा) से टोंक के मध्य बनास नदी द्वारा निर्मित मैदान।
- पीडमॉन्ट का मैदान:
- • देवगढ़ (राजसमंद) से भीलवाड़ा के मध्य बनास नदी द्वारा निर्मित अवशिष्ट पहाड़ी युक्त मैदान।
3. माही बेसिन (Mahi Basin)
- स्थान: राजस्थान के दक्षिणी भाग में माही नदी के आस-पास का क्षेत्र।
- प्राचीन नाम: इसे प्राचीनकाल में पुष्प प्रदेश के नाम से जाना जाता था।
- छप्पन का मैदान:
- • प्रतापगढ़ से बाँसवाड़ा के मध्य स्थित छप्पन गाँवों या नदी-नालों का समूह।
- कांठल का मैदान:
- • प्रतापगढ़ में स्थित माही नदी का तटवर्ती मैदान।
- वागड़ प्रदेश:
• डूंगरपुर और बाँसवाड़ा के मध्य स्थित माही नदी द्वारा निर्मित विखंडित पहाड़ी क्षेत्र।
दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती का पठार)
🕰️ उत्पत्ति और नामकरण
- अन्य नाम: हाड़ौती का पठार (प्राचीनकाल में हाड़ा वंश के क्षेत्राधिकार के कारण)।
- उत्पत्ति काल: मध्यजीवी महाकल्प (द्वितीयक महाकल्प) के क्रिटेशियस काल में।
- निर्माण प्रक्रिया: गोंडवाना लैंड में ज्वालामुखी क्रिया के दरारी उद्गार से निकले लावा के जमाव से इसका निर्माण हुआ।
- प्रायद्वीपीय पठार का भाग: यह मालवा के पठार का उत्तरी भाग है, जिसका विस्तार राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में है।
🗺️ विस्तार और भौगोलिक आयाम
- क्षेत्रफल: $24,185 \text{वर्ग किलोमीटर}$, जो राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का 7% है।
- • क्षेत्रफल की दृष्टि से यह राजस्थान का सबसे छोटा भौतिक प्रदेश है।
- जनसंख्या: राजस्थान की कुल जनसंख्या का लगभग 13% भाग निवास करता है।
- अक्षांशीय विस्तार: $23^{\circ}51′ \text{उत्तरी अक्षांश}$ से $25^{\circ}27′ \text{उत्तरी अक्षांश}$ के मध्य।
- देशांतरीय विस्तार: $75^{\circ}15′ \text{पूर्वी देशान्तर}$ से $77^{\circ}25′ \text{पूर्वी देशान्तर}$ के मध्य।
- औसत ऊँचाई: लगभग 500 मीटर।
- ढाल: ढाल दक्षिण से उत्तर की ओर है।
⭐ प्रमुख विशेषताएँ
- संक्रांति प्रदेश: यह अरावली-विंध्याचल-प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र का संक्रमण स्थल है।
- महान सीमा भ्रंश (Great Boundary Fault – GBF): बूँदी से सवाईमाधोपुर के मध्य स्थित एक भ्रंश घाटी (Fault Valley)।
- चट्टानें: ज्वालामुखी के दरारी उद्गार से निर्मित क्रिटेशियस कालीन बैसाल्ट चट्टानों का विस्तार।
- • इस कारण यहाँ बलुआ पत्थर तथा एल्युमिनियम के भंडार पाए जाते हैं।
- मृदा: ज्वालामुखी क्रिया से निकले लावा के विखंडन से निर्मित काली मृदा (Vertisols) का विस्तार है।
- प्रमुख नदी: चम्बल नदी, जो दक्षिण से उत्तर दिशा में बहती है।
- सर्वाधिक नदियाँ: राजस्थान में सर्वाधिक नदियाँ इसी पठार में प्रवाहित होती हैं, जिसमें सबसे बड़ा चम्बल नदी तंत्र शामिल है।
- मृदा अपरदन: नदियों की अधिकता के कारण यहाँ जल द्वारा मृदा अपरदन की समस्या सर्वाधिक है।
- अपवाह तंत्र: यहाँ अन्त: अस्पष्ट-अधर प्रवाह तंत्र नामक विशेष प्रकार की अपवाह श्रेणी पाई जाती है।
- मानसूनी प्रवेश द्वार: दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा हाड़ौती के पठार से राजस्थान में प्रवेश करती है।
- सर्वाधिक वर्षा और आर्द्रता: यह राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा ($80 \text{सेमी}$ से अधिक) तथा सर्वाधिक आर्द्रता वाला भौतिक प्रदेश है (यहाँ अति आर्द्र जलवायु पाई जाती है)।
🏞️ धरातलीय उप-प्रदेश
धरातलीय भिन्नता के कारण इस प्रदेश को पाँच उप-प्रदेशों में विभाजित किया गया है:
1. अर्द्ध चन्द्राकार पर्वत श्रेणियाँ
- विस्तार: बूँदी-मुकुन्दरा पर्वत चोटियों के रूप में अर्द्ध-चन्द्राकार स्वरूप।
- बूँदी की पर्वत श्रेणियाँ:
- • यह दोहरी पर्वतमाला है, जिसकी कुल लंबाई $96 \text{किमी}$ है।
- • औसत ऊँचाई: $300-350 \text{मीटर}$।
- • सर्वोच्च शिखर: सतूर ($353 \text{मीटर}$)।
- • प्रमुख दर्रे: बूँदी दर्रा, जैतवास दर्रा, रामगढ़-खटगढ़ (मेज नदी मार्ग), लाखेरी दर्रा।
- मुकुन्दरा की पर्वत श्रेणियाँ:
- • विस्तार: उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व में लगभग $120 \text{किमी}$।
- • औसत ऊँचाई: $335-503 \text{मीटर}$।
- • सर्वोच्च चोटी: चाँदवाड़ी ($517 \text{मीटर}$)।
2. नदी निर्मित मैदान
- • यह क्षेत्र चम्बल और उसकी सहायक नदियों (कालीसिंध, पार्वती, मेज) द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी के जमाव से बना है।
3. शाहबाद का उच्च क्षेत्र
- • स्थान: बाराँ के पूर्वी क्षेत्र में, मध्य प्रदेश से लगा हुआ ($300 \text{मीटर}$ ऊँचाई)।
- • सर्वोच्च श्रेणी: कस्बा थाना ($456 \text{मीटर}$)।
- • विशेष भू-आकृति: रामगढ़ की पहाड़ी (घोड़े की नाल की आकृति – Horse Shoe type), जिसका उद्गम टेक्टोनिक कारणों से हुआ।
4. झालावाड़ का पठार
- • स्थान: मुकुन्दरा की श्रेणियों के दक्षिण में ($300 \text{से } 450 \text{मीटर}$ की ऊँचाई)।
- • संबंध: यह मालवा के पठार का अभिन्न अंग है।
5. डग-गंगधर उच्च प्रदेश
- • स्थान: हाड़ौती के पठार के दक्षिण-पश्चिम में विस्तृत ($450 \text{मीटर}$ ऊँचाई)।
- • पश्चिमी सीमा: चम्बल नदी द्वारा निर्धारित।
- • विशेषता: उच्च क्षेत्र होने के बावजूद भी यह कृषि क्षेत्र है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
ऊपरमाल पठारी क्षेत्र: भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) से बिजौलिया (भीलवाड़ा) के बीच का पठारी क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश का ही भाग है।
भौतिक प्रदेशो का तुलनात्मक अध्ययन
विशेषताएँ | 🏜️ पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश | ⛰️ अरावली पर्वतीय प्रदेश | 🌾 पूर्वी मैदानी प्रदेश | 🌋 दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश |
क्षेत्रफल (%) | 61.11% (सबसे बड़ा) | 9% | 23% | 7% (सबसे छोटा) |
जनसंख्या (%) | 40% | 10% | 39% (सर्वाधिक जनघनत्व) | 11% |
उत्पत्ति काल | प्लीस्टोसीन काल | प्री-कैम्ब्रियन काल (प्राचीनतम) | प्लीस्टोसीन काल | क्रिटेशियस काल |
अवशेष | टेथिस सागर | गोंडवाना लैंड | टेथिस सागर | गोंडवाना लैंड |
मुख्य विशेषता | धनी मरुस्थल (जैव-विविधता में प्रथम) | धात्विक खनिज का भंडार, जल विभाजक रेखा | सर्वाधिक उपजाऊ और कृषि प्रधान | सर्वाधिक वर्षा और आर्द्रता (अति आर्द्र जलवायु) |
औसत ऊँचाई | $150 \text{मी. से } 300 \text{मी.}$ | $\text{औसत } 930 \text{ मी.}$ (गुरुशिखर $1722 \text{ मी.}$) | $200 \text{ मी. से } 280 \text{ मी.}$ | $\text{औसत } 500 \text{ मी.}$ |
ढाल (Slope) | पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण | – | पश्चिम से पूर्व | दक्षिण से उत्तर |
मृदा (मिट्टी) | रेतीली बलुई (एरिडीसोल, एन्टीसोल) | लाल मृदा (इन्सेप्टीसोल) | जलोढ़ मृदा (एल्फीसोल) | काली मृदा (वर्टीसोल) |
जलवायु | शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क | उप-आर्द्र | आर्द्र | अति-आर्द्र |